PM मोदी ने देश को समर्पित किया Western DFC: तेज होगी माल ढुलाई, बदलेंगे भारत के लॉजिस्टिक्स का नक्शा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (Western Dedicated Freight Corridor-WDFC) को देश को समर्पित किया। यह परियोजना भारत के माल परिवहन और लॉजिस्टिक्स ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) का उद्देश्य मालगाड़ियों के लिए अलग और तेज रेल नेटवर्क उपलब्ध कराना है, जिससे मौजूदा रेलवे लाइनों पर माल ढुलाई का दबाव कम हो और यात्री ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध हो सके।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर क्या है?
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) ऐसे विशेष रेल गलियारे हैं जिन्हें मुख्य रूप से मालगाड़ियों के संचालन के लिए विकसित किया गया है। सामान्य रेलवे नेटवर्क पर यात्री और मालगाड़ियां एक ही ट्रैक साझा करती हैं, जिससे मालगाड़ियों की गति और संचालन प्रभावित हो सकता है। DFC में मालगाड़ियों के लिए अलग क्षमता उपलब्ध होने से माल परिवहन को अधिक तेज और कुशल बनाया जा सकता है।
गोल्डन क्वाड्रिलैटरल और DFC का संबंध
भारतीय रेलवे का वह नेटवर्क जो दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और हावड़ा जैसे चार बड़े शहरों को आपस में जोड़ता है, आम तौर पर ‘गोल्डन क्वाड्रिलैटरल’ (स्वर्णिम चतुर्भुज) के नाम से जाना जाता है। देश के बड़े हिस्से में माल और यात्री परिवहन के लिए यह रेल नेटवर्क अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि, इसी नेटवर्क पर बढ़ते माल यातायात के कारण रेलवे की मौजूदा क्षमता पर दबाव भी बढ़ता है। इसी चुनौती को देखते हुए मालगाड़ियों के लिए अलग कॉरिडोर विकसित करने की आवश्यकता महसूस हुई और इसी से Dedicated Freight Corridor Project को गति मिली।
DFC परियोजना का इतिहास
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना का विचार 2005 में सामने आया था। इसके बाद वर्ष 2008 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को मंजूरी दी:
- ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC)
- वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC)
आज ये दोनों भारत के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क की मुख्य आधारभूत परियोजनाएं हैं। दोनों कॉरिडोर मिलकर लगभग 2,843 किलोमीटर लंबा नेटवर्क बनाते हैं।
ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC)
ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) की लंबाई लगभग 1,337 किलोमीटर है। यह कॉरिडोर पंजाब के न्यू साहनेवाल से शुरू होकर हरियाणा और उत्तर प्रदेश से गुजरते हुए बिहार के न्यू सोननगर तक जाता है।
EDFC का महत्व
EDFC को मुख्य रूप से देश के महत्वपूर्ण कोयला उत्पादक क्षेत्रों और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने के लिए विकसित किया गया है। यह उन क्षेत्रों से होकर गुजरता है जहां विभिन्न प्रकार के महत्वपूर्ण कच्चे माल उपलब्ध हैं, जैसे:
- कोकिंग कोल
इसलिए EDFC भारत के औद्योगिक उत्पादन और कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। EDFC वर्ष 2023 में पूरा हुआ।
वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC)
वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) की लंबाई लगभग 1,506 किलोमीटर है। यह उत्तर प्रदेश के न्यू दादरी से शुरू होकर हरियाणा, राजस्थान और गुजरात से गुजरते हुए महाराष्ट्र के न्यू JNPT तक जाता है।
WDFC का प्रमुख उद्देश्य देश के बड़े औद्योगिक क्षेत्रों को महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स सेंटरों और बंदरगाहों से जोड़ना है। विशेष रूप से महाराष्ट्र में स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट क्षेत्र (JNPT) जैसे प्रमुख बंदरगाहों तक माल की तेज आवाजाही के लिए यह कॉरिडोर महत्वपूर्ण है। इस प्रकार WDFC उत्तर भारत के औद्योगिक और उपभोक्ता बाजारों को पश्चिमी भारत के बंदरगाहों और व्यापारिक केंद्रों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
तीसरे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का विस्तार
केंद्रीय बजट में तीसरे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की घोषणा के साथ भारत के DFC नेटवर्क के और विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। प्रस्तावित नया कॉरिडोर लगभग 2,052 किलोमीटर लंबा होगा। यह पश्चिम बंगाल के डंकुनी से शुरू होकर गुजरात के सूरत तक जाएगा। यह नया DFC छह राज्यों को जोड़ेगा:
- पश्चिम बंगाल
- छत्तीसगढ़
- मध्य प्रदेश
- महाराष्ट्र
इस कॉरिडोर के विकसित होने से पूर्वी भारत के औद्योगिक और खनिज क्षेत्रों को पश्चिमी भारत के औद्योगिक तथा व्यापारिक केंद्रों से बेहतर रेल संपर्क मिलने की संभावना है।
DFC की प्रमुख विशेषताएं
1. डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेनें
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण बदलावों में से एक है डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेनों का संचालन।
डबल-स्टैक ट्रेनें कंटेनरों की दो परतें ले जा सकती हैं। इसका अर्थ है कि एक ही ट्रेन में अधिक मात्रा में माल ले जाना संभव होता है। इससे:
- माल ढुलाई की क्षमता बढ़ती है।
- प्रति यूनिट माल परिवहन की दक्षता बेहतर होती है।
- लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में मदद मिल सकती है।
- बंदरगाहों और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच माल की आवाजाही अधिक कुशल हो सकती है।
2. केवल मालगाड़ियों के लिए समर्पित ट्रैक
सामान्य रेलवे लाइनों के विपरीत, DFC मुख्य रूप से मालगाड़ियों के लिए समर्पित है। इन कॉरिडोर पर मालगाड़ियों को 100 किलोमीटर प्रति घंटे (kmph) तक की रफ्तार की अनुमति है। तेज गति और अलग ट्रैक उपलब्ध होने के कारण मालगाड़ियों के यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। उदाहरण के लिए, वेस्टर्न DFC पर 100 किलोमीटर की दूरी तय करने में औसतन लगभग ढाई घंटे लगते हैं, जबकि सामान्य रेलवे ट्रैक पर इतनी दूरी तय करने में लगभग छह घंटे लग सकते हैं। इससे माल परिवहन की गति में बड़ा सुधार होता है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का महत्व
भारत जैसे विशाल देश में माल परिवहन की दक्षता का सीधा संबंध औद्योगिक उत्पादन, व्यापार और आर्थिक विकास से है। इसी कारण DFC को केवल रेलवे परियोजना नहीं, बल्कि देश के व्यापक लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
- DFC मालगाड़ियों के लिए अतिरिक्त रेल क्षमता उपलब्ध करा रहे हैं।
- इससे मौजूदा भारतीय रेलवे नेटवर्क पर माल ढुलाई का दबाव कम होता है।
2. यात्री ट्रेनों के लिए अतिरिक्त क्षमता
- जब मालगाड़ियों के लिए अलग कॉरिडोर उपलब्ध होते हैं, तो सामान्य रेलवे नेटवर्क पर मालगाड़ियों का दबाव कम हो जाता है।
- इससे मौजूदा रेलवे लाइनों पर यात्री ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध हो सकती है।
- इसका अर्थ है कि DFC का लाभ केवल माल परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव यात्री रेल सेवाओं पर भी पड़ सकता है।
3. लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार
- DFC से देश की लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
- तेज और अधिक व्यवस्थित माल परिवहन से उत्पादन केंद्रों, बाजारों, लॉजिस्टिक्स हब और बंदरगाहों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होती है।
- इससे सप्लाई चेन को अधिक कुशल बनाने में मदद मिल सकती है।
4. सप्लाई चेन को गति
- माल की आवाजाही में लगने वाला समय कम होने से उद्योगों को कच्चा माल और तैयार उत्पाद अपेक्षाकृत तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में मदद मिलती है।
- इससे देश की सप्लाई चेन दक्षता बेहतर हो सकती है और विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।
माल परिवहन के समय और लागत में कमी
DFC परियोजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य माल परिवहन में लगने वाले समय को कम करना है। उम्मीद है कि मिश्रित-उपयोग वाले भारतीय रेलवे ट्रैक पर मालगाड़ी द्वारा दूरी तय करने में लगने वाले समय में लगभग 60% तक की कमी आ सकती है। इसी तरह, कंटेनर कार्गो के मामले में लागत बचत की अधिकतम संभावना लगभग 25% बताई गई है। समय और लागत में इस प्रकार की कमी भारत की लॉजिस्टिक्स प्रतिस्पर्धात्मकता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
भारत के आर्थिक विकास में DFC की भूमिका
भारत में औद्योगिकीकरण और व्यापार के विस्तार के साथ माल परिवहन की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में तेज, विश्वसनीय और कुशल रेल माल परिवहन नेटवर्क की आवश्यकता भी बढ़ती है। DFC के माध्यम से:
- औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलती है।
- बंदरगाहों तक माल पहुंचाने में तेजी आती है।
- माल ढुलाई की क्षमता बढ़ती है।
- मौजूदा रेलवे नेटवर्क पर दबाव कम होता है।
- यात्री ट्रेनों के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध हो सकती है।
- लॉजिस्टिक्स लागत और समय को कम करने में मदद मिलती है।
- सप्लाई चेन अधिक कुशल बन सकती है।
- आर्थिक विकास को गति मिल सकती है।
इस प्रकार DFC भारत के रेलवे आधुनिकीकरण, लॉजिस्टिक्स सुधार और आर्थिक विकास के व्यापक लक्ष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजना है।

