स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026: लखनऊ अव्वल, दिल्ली 30वें स्थान पर; जानिए NCAP, रैंकिंग और प्रमुख तथ्य
भारत में वायु प्रदूषण से निपटने और शहरों में स्वच्छ हवा सुनिश्चित करने के प्रयासों के बीच केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026’ के परिणाम जारी किए हैं। इस सर्वेक्षण में देश के शहरों द्वारा वायु प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों को कम करने के लिए उठाए गए कदमों का मूल्यांकन किया गया है। खास बात यह है कि देश की राजधानी दिल्ली बड़े शहरों की श्रेणी में 30वें स्थान पर रही जबकि लखनऊ ने पहला स्थान हासिल किया।
यह सर्वेक्षण भारत के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत शहरों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की प्रगति को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण क्या है?
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम यानी NCAP के तहत किया जाने वाला एक वार्षिक मूल्यांकन है। इसके अंतर्गत 130 शहरों का आकलन किया जाता है। इसकी शुरुआत 2022–23 में की गई थी और यह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की पहल है।
किन प्रदूषण स्रोतों का मूल्यांकन किया जाता है?
शहरों की रैंकिंग केवल वायु गुणवत्ता के एक आँकड़े पर आधारित नहीं होती बल्कि प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों को भी महत्व दिया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- सड़क की धूल
- निर्माण एवं विध्वंस से निकलने वाला कचरा
- वाहनों से होने वाला प्रदूषण
- औद्योगिक प्रदूषण
इस प्रकार सर्वेक्षण शहरों की स्वच्छ वायु प्रबंधन क्षमता और प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों का व्यापक मूल्यांकन करने का प्रयास करता है।
आबादी के आधार पर शहरों की तीन श्रेणियाँ
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में शहरों को उनकी आबादी के आधार पर तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाता है:
- 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर
- 3 लाख से 10 लाख आबादी वाले शहर
- 3 लाख से कम आबादी वाले शहर
इस वर्गीकरण का उद्देश्य अलग-अलग आकार के शहरों के प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों का अधिक उपयुक्त तरीके से मूल्यांकन करना है।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 की प्रमुख बातें
10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में लखनऊ अव्वल
सबसे बड़ी आबादी वाली श्रेणी में लखनऊ ने पहला स्थान हासिल किया। वहीं भारत की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली 30वें स्थान पर रही। इसके अलावा मुंबई और बेंगलुरु भी दिल्ली से नीचे रहे। यह परिणाम बड़े महानगरों में प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छ वायु प्रबंधन की चुनौती को सामने लाता है।
इंदौर दूसरे और जबलपुर तीसरे स्थान पर
भारत के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में प्रसिद्ध इंदौर ने 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में दूसरा स्थान हासिल किया। जबलपुर इस श्रेणी में तीसरे स्थान पर रहा। इससे पता चलता है कि बड़े शहरों में भी ठोस कचरा प्रबंधन, सड़क की धूल, वाहनों और अन्य प्रदूषण स्रोतों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी उपाय रैंकिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सबसे निचले पाँच शहर
10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में चेन्नई, जमशेदपुर, कोटा, कोलकाता और मदुरै सबसे निचले पाँच शहरों में शामिल रहे। यह रैंकिंग इस बात की ओर ध्यान आकर्षित करती है कि बड़े शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केवल एक क्षेत्र में सुधार पर्याप्त नहीं है, बल्कि विभिन्न प्रदूषण स्रोतों पर एक साथ काम करना आवश्यक है।
मध्यम आबादी वाले शहरों में राउरकेला शीर्ष पर
3 लाख से 10 लाख आबादी वाले शहरों की श्रेणी में राउरकेला ने पहला स्थान हासिल किया। यह श्रेणी उन शहरों को कवर करती है जिनकी आबादी 3 लाख से अधिक लेकिन 10 लाख से कम है।
छोटे शहरों में कलिंग नगर अव्वल
3 लाख से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में कलिंग नगर ने पहला स्थान हासिल किया। इससे स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में छोटे शहरों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है।
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) क्या है?
शहरी वायु प्रदूषण को कम करने के लिए भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme—NCAP) शुरू किया। NCAP की शुरुआत 2019 में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) द्वारा की गई थी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए शहर, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित प्रयास करना है।
NCAP कैसे काम करता है?
NCAP के तहत प्रदूषण के विशिष्ट स्रोतों को कम करने के लिए शहर, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की स्वच्छ वायु कार्य योजनाओं पर जोर दिया जाता है। इन कार्य योजनाओं में स्थानीय परिस्थितियों और प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों को ध्यान में रखते हुए उपाय किए जाते हैं। कार्यक्रम की निगरानी के लिए केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर गठित विभिन्न समितियाँ काम करती हैं। इस प्रकार NCAP एक बहु-स्तरीय व्यवस्था के माध्यम से वायु प्रदूषण को कम करने का प्रयास करता है।
NCAP का PM10 लक्ष्य
NCAP के तहत एक प्रमुख लक्ष्य 2025–26 तक PM10 के स्तर में 40% तक कमी लाना या फिर राष्ट्रीय मानकों (60 µg/m³) को प्राप्त करना है।
PM10 क्या है?
PM10 (Particulate Matter 10) ऐसे सूक्ष्म कणों को कहा जाता है जिनका व्यास लगभग 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये कण हवा में मौजूद रह सकते हैं और सांस के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियाँ, औद्योगिक प्रक्रियाएँ और अन्य स्रोत PM10 प्रदूषण में योगदान कर सकते हैं।
इसलिए PM10 की मात्रा में कमी शहरी वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए महत्वपूर्ण संकेतक है।
वित्त वर्ष 2025–26 में NCAP की प्रगति
वित्त वर्ष 2025–26 में NCAP के तहत कई शहरों ने PM10 के स्तर में कमी दर्ज की। कुल 108 शहरों ने 2017–18 के आधार वर्ष की तुलना में अपने वार्षिक PM10 स्तर में कमी दर्ज की। इनमें:
- 72 शहरों में PM10 में 20% से अधिक कमी हुई।
- 26 शहरों में 40% से अधिक कमी दर्ज की गई।
- 14 शहरों ने NAAQS (National Ambient Air Quality Standards) हासिल किए।
ये आँकड़े बताते हैं कि कई शहरों में वायु प्रदूषण कम करने के प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है।
NAAQS क्या है?
NAAQS यानी National Ambient Air Quality Standards का अर्थ है राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक। ये मानक वायुमंडलीय हवा में विभिन्न प्रदूषकों की स्वीकार्य सीमा निर्धारित करने के लिए उपयोग किए जाते हैं। स्वच्छ वायु नीति के संदर्भ में NAAQS का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि इससे यह निर्धारित करने में मदद मिलती है कि किसी क्षेत्र की परिवेशी हवा निर्धारित राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है या नहीं।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण का महत्व
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण केवल शहरों की रैंकिंग जारी करने तक सीमित नहीं है। यह शहरों के बीच स्वच्छ वायु प्रबंधन के लिए प्रतिस्पर्धा और बेहतर प्रदर्शन की भावना को बढ़ावा देने का भी माध्यम है। इसके माध्यम से शहरों को अपने प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की पहचान करने और उनके नियंत्रण के लिए प्रभावी उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। सड़क की धूल और कचरे से लेकर वाहनों तथा उद्योगों तक, अलग-अलग स्रोतों पर कार्रवाई करके ही शहरी वायु प्रदूषण को प्रभावी रूप से कम किया जा सकता है।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण और NCAP में संबंध
NCAP व्यापक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जबकि स्वच्छ वायु सर्वेक्षण उसके तहत शहरों के प्रयासों और प्रदर्शन का वार्षिक मूल्यांकन करने वाला महत्वपूर्ण तंत्र है। दोनों का व्यापक उद्देश्य देश के शहरों में वायु प्रदूषण को कम करना और स्वच्छ हवा की दिशा में प्रगति करना है। इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं में इन दोनों के बीच अंतर और संबंध को समझना महत्वपूर्ण है।
