‘सागर मंथन’ जहाज़ लॉन्च: गहरे समुद्र में भारत की खोज और ब्लू इकोनॉमी को मिलेगी नई ताकत


कोलकाता स्थित कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) लिमिटेड ने ‘सागर मंथन’ नामक जहाज़ लॉन्च किया है। यह भारत की समुद्री वैज्ञानिक और अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

‘सागर मंथन’ जहाज़ लॉन्च गहरे समुद्र में भारत की खोज और ब्लू इकोनॉमी को मिलेगी नई ताकत

‘सागर मंथन’ जहाज़ के बारे में

‘सागर मंथन’ एक स्वदेशी समुद्री अनुसंधान पोत (Ocean Research Vessel—ORV) है। इसे नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (NCPOR) के लिए बनाया जा रहा है। जहाज़ के समुद्र में बड़े पैमाने पर परीक्षण यानी सी ट्रायल्स पूरे होने के बाद इसके 2028 तक चालू होने की उम्मीद है।

यह जहाज़ हर मौसम में काम करने वाला और मल्टी-डिसिप्लिनरी प्लेटफॉर्म होगा। इसका मतलब है कि इसका इस्तेमाल समुद्र से संबंधित विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिक अनुसंधान, सर्वेक्षण और खोज कार्यों के लिए किया जा सकेगा।

डीप ओशन मिशन के तहत निर्माण

‘सागर मंथन’ को भारत के महत्वाकांक्षी डीप ओशन मिशन (Deep Ocean Mission—DOM) के वर्टिकल-4, यानी गहरे समुद्र के सर्वे और खोज के तहत विकसित किया जा रहा है। इसके विकास पर लगभग 840 करोड़ रुपये की लागत आने की उम्मीद है। यह परियोजना भारत की गहरे समुद्र में वैज्ञानिक अनुसंधान और समुद्री संसाधनों की खोज की क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

जहाज़ की प्रमुख विशेषताएं

‘सागर मंथन’ की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं:

  • प्रकार: स्वदेशी महासागरीय अनुसंधान पोत (ORV)
  • निर्माता: गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) लिमिटेड
  • उपयोगकर्ता संस्था: नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (NCPOR)
  • लागत: लगभग 840 करोड़ रुपये
  • अधिकतम निरंतर रेटिंग के 90% पर गति: 14 नॉट
  • अनुमानित सेवा आयु: लगभग 30 वर्ष
  • प्रकृति: हर मौसम में काम करने वाला मल्टी-डिसिप्लिनरी प्लेटफॉर्म
  • संभावित संचालन: 2028 तक

समुद्री खनिजों की खोज में मिलेगी मदद

‘सागर मंथन’ भारत के लिए समुद्र में मौजूद महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों की खोज को मजबूत करेगा। विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में मैंगनीज नोड्यूल्स और पॉलीमेटैलिक सल्फाइड्स जैसे समुद्री खनिज संसाधनों की खोज में इस जहाज़ की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

गहरे समुद्र में मौजूद ये खनिज रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसलिए समुद्र के भीतर सर्वेक्षण और खोज के लिए स्वदेशी वैज्ञानिक पोत भारत की समुद्री क्षमताओं को बढ़ाने में मदद कर सकता है।

डीप ओशन मिशन क्या है?

डीप ओशन मिशन (DOM) भारत सरकार द्वारा 2021 में शुरू किया गया मिशन है। इसका प्रमुख उद्देश्य समुद्र में मौजूद संसाधनों का टिकाऊ तरीके से उपयोग करना तथा देश की ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) को मजबूत करना है।

समुद्र में उपलब्ध जैविक, खनिज और अन्य संसाधनों का वैज्ञानिक एवं टिकाऊ उपयोग भारत के आर्थिक विकास के साथ-साथ समुद्री अनुसंधान और तकनीकी क्षमताओं के लिए भी महत्वपूर्ण है।

समुद्रयान प्रोजेक्ट और मत्स्य 6000

डीप ओशन मिशन के तहत ‘समुद्रयान प्रोजेक्ट’ भी चलाया जा रहा है। इसके हिस्से के रूप में भारत का पहला मानवयुक्त सबमर्सिबल व्हीकल विकसित किया जा रहा है। इस वाहन का नाम ‘मत्स्य 6000’ है। यह एक ऐसा पानी के नीचे जाने वाला वाहन होगा, जिसे इंसानों को गहरे समुद्र में ले जाने के लिए विकसित किया जा रहा है।
‘मत्स्य 6000’ परियोजना भारत की गहरे समुद्र में मानवयुक्त खोज और वैज्ञानिक अनुसंधान की क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

भारत के लिए ‘सागर मंथन’ का महत्व

‘सागर मंथन’ जैसे स्वदेशी समुद्री अनुसंधान पोत भारत को गहरे समुद्र से जुड़े वैज्ञानिक अनुसंधान में अधिक आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकते हैं। इसके जरिए समुद्री संसाधनों का सर्वेक्षण, वैज्ञानिक अध्ययन और खनिजों की खोज जैसे विभिन्न कार्य किए जा सकेंगे।

वहीं, डीप ओशन मिशन, समुद्रयान प्रोजेक्ट और मत्स्य 6000 जैसी परियोजनाएं मिलकर भारत की डीप-सी टेक्नोलॉजी, समुद्री अनुसंधान और ब्लू इकोनॉमी से जुड़ी क्षमताओं को आगे बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।



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