कलिंग रत्न पुरस्कार-2026 से सम्मानित हुए पूर्व CJI जस्टिस दीपक मिश्रा


भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस दीपक मिश्रा को वर्ष 2026 के ‘कलिंग रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। ‘कलिंग रत्न पुरस्कार’ ओडिशा का एक प्रतिष्ठित राज्य-स्तरीय नागरिक सम्मान है जो विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले योग्य व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है।

कलिंग रत्न पुरस्कार-2026 से सम्मानित हुए पूर्व CJI जस्टिस दीपक मिश्रा

जस्टिस दीपक मिश्रा को मिला कलिंग रत्न पुरस्कार-2026

पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा को ‘कलिंग रत्न पुरस्कार-2026’ से सम्मानित किया जाना इस पुरस्कार की प्रतिष्ठा को दर्शाता है। न्यायपालिका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जस्टिस दीपक मिश्रा भारत के 45वें मुख्य न्यायाधीश रहे हैं।

‘कलिंग रत्न’ सम्मान के माध्यम से ओडिशा से जुड़े ऐसे व्यक्तित्वों के योगदान को पहचान दी जाती है, जिन्होंने राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया हो।

कब शुरू हुआ था कलिंग रत्न पुरस्कार?

कलिंग रत्न पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। इसे ‘सरला साहित्य संसद’ द्वारा प्रदान किया जाता है।
यह एक वार्षिक राज्य-स्तरीय नागरिक सम्मान है। इसका उद्देश्य ओडिशा के किसी योग्य व्यक्ति द्वारा राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किसी भी क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित करना है।

इस प्रकार यह पुरस्कार केवल साहित्य तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज, शिक्षा, प्रशासन, राजनीति, न्यायपालिका तथा अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तियों को भी प्रदान किया जा सकता है।

पुरस्कार में क्या दिया जाता है?

कलिंग रत्न पुरस्कार प्राप्त करने वाले व्यक्ति को सम्मान के रूप में देवी सरस्वती की चांदी की मूर्ति और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाता है। देवी सरस्वती को ज्ञान, शिक्षा, कला और साहित्य की देवी माना जाता है। इसलिए पुरस्कार के साथ सरस्वती की चांदी की प्रतिमा दिया जाना ज्ञान और उत्कृष्ट योगदान के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

कलिंग रत्न पुरस्कार पाने वाले प्रमुख व्यक्तित्व

समय-समय पर कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों को इस सम्मान से नवाजा जा चुका है। इसके प्रमुख प्राप्तकर्ताओं में शामिल हैं:

  • पूर्व लोकसभा अध्यक्ष श्रीयुक्त रबी राय
  • आंध्र प्रदेश के पूर्व राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन
  • पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान
  • पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा — कलिंग रत्न पुरस्कार-2026

इन व्यक्तित्वों का अपने-अपने क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

सरला साहित्य संसद क्या है?

‘सरला साहित्य संसद’ ओडिशा का एक प्रमुख साहित्यिक और सांस्कृतिक संगठन है। इसकी स्थापना 1982 में कटक, ओडिशा में हुई थी। यह संगठन मुख्य रूप से ओडिया भाषा, साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है। इसके साथ ही संगठन ओडिशा की समृद्ध साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सरला दास की विरासत के संरक्षण में भूमिका

सरला साहित्य संसद का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य ओडिशा के 15वीं सदी के ‘आदि कवि’ सरला दास की विरासत को संरक्षित करना है। सरला दास को ओडिया साहित्य के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उन्हें ‘आदि कवि’ यानी पहले कवि के रूप में जाना जाता है। ओडिया भाषा और साहित्य के विकास में उनके योगदान को ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

सरला साहित्य संसद साहित्यिक गतिविधियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से ओडिया भाषा एवं साहित्य की परंपरा को आगे बढ़ाने तथा सरला दास की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए समर्पित है।

कलिंग रत्न पुरस्कार का महत्व

कलिंग रत्न पुरस्कार केवल एक सम्मान नहीं है, बल्कि यह ओडिशा की प्रतिभाओं और उनके योगदान को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का माध्यम भी है। विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करके यह पुरस्कार समाज में उल्लेखनीय योगदान के महत्व को रेखांकित करता है।
जस्टिस दीपक मिश्रा को वर्ष 2026 में यह सम्मान मिलना न्यायपालिका के क्षेत्र में उनके योगदान को सम्मानित किए जाने के रूप में भी देखा जा सकता है।



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