‘100%’ फूड प्रोडक्ट के दावों पर CCPA की कार्रवाई: उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले विज्ञापनों पर सख्ती
खाद्य उत्पादों पर ‘100%’ का दावा करने वाली कंपनियों के खिलाफ सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने कार्रवाई की है। CCPA का मानना है कि किसी खाद्य उत्पाद के लिए ‘100%’ जैसे दावे उपभोक्ताओं के बीच पूरी शुद्धता या उत्पाद के पूरी तरह उसी चीज से बने होने की गलतफहमी पैदा कर सकते हैं।
ऐसे दावों से उपभोक्ता किसी उत्पाद की वास्तविक प्रकृति, गुणवत्ता या उसमें मौजूद अन्य सामग्री को लेकर भ्रमित हो सकते हैं। इसी कारण उपभोक्ता संरक्षण से जुड़ी संस्था ने इस तरह के दावों को गंभीरता से लिया है।
सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) क्या है?
सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) की स्थापना कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 की धारा 10 के तहत की गई है। CCPA का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों को एक वर्ग के रूप में बढ़ावा देना, उनकी रक्षा करना और इन अधिकारों को लागू कराना है। यह संस्था उपभोक्ताओं को अनुचित व्यापार व्यवहार और भ्रामक विज्ञापनों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
CCPA की प्रमुख शक्तियां और कार्य
CCPA को उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण शक्तियां प्रदान की गई हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- CCPA उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन की जांच कर सकती है। जरूरत पड़ने पर यह शिकायत दर्ज कर सकती है या कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकती है।
2. असुरक्षित सामान और सेवाओं को वापस मंगाने का आदेश
- यदि कोई सामान या सेवा उपभोक्ताओं के लिए असुरक्षित पाई जाती है, तो CCPA उसके रिकॉल यानी वापस मंगाने का आदेश दे सकती है।
3. अनुचित व्यापार व्यवहार और भ्रामक विज्ञापन पर रोक
- CCPA को अनुचित व्यापार तौर-तरीकों और भ्रामक विज्ञापनों को बंद करने का आदेश देने की शक्ति प्राप्त है।
4. भ्रामक विज्ञापनों पर जुर्माना
- भ्रामक विज्ञापनों के लिए उनके निर्माताओं, समर्थन करने वालों (Endorsers) और प्रकाशकों पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
इस तरह CCPA का उद्देश्य केवल शिकायतों पर कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि बाजार में ऐसे व्यापारिक व्यवहार को रोकना भी है जो उपभोक्ताओं को गलत जानकारी देकर प्रभावित कर सकता है।
कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019
कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 ने पुराने कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 1986 का स्थान लिया है। नए कानून का उद्देश्य बदलते समय के साथ उपभोक्ताओं की नई चिंताओं को दूर करने के लिए उपभोक्ता संरक्षण के दायरे को व्यापक बनाना है। यह कानून उपभोक्ताओं को अधिक प्रभावी सुरक्षा प्रदान करने और उनके अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
नए कानून में भ्रामक जानकारी और विज्ञापन
कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के तहत सामान या सेवा की गुणवत्ता या मात्रा के बारे में गलत जानकारी देना तथा भ्रामक विज्ञापन जैसे मामलों को मान्यता दी गई है। इसका अर्थ है कि यदि किसी उत्पाद के बारे में ऐसी जानकारी दी जाती है जिससे उपभोक्ता उसकी गुणवत्ता, मात्रा या वास्तविक प्रकृति को लेकर भ्रमित हो सकता है, तो ऐसे मामलों पर उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
धारा 21 के तहत CCPA की शक्ति
कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 की धारा 21 CCPA को भ्रामक या गलत विज्ञापनों के खिलाफ महत्वपूर्ण अधिकार देती है। इस धारा के तहत CCPA किसी गलत या भ्रामक विज्ञापन को बंद करने या उसमें बदलाव करने का आदेश दे सकती है।
इसके अलावा, कानून में भ्रामक विज्ञापन तैयार करने, उसका समर्थन करने या उसे प्रकाशित करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है।
कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 कब लागू हुआ?
कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 जुलाई 2020 में लागू हुआ। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को सशक्त बनाना और उनके अधिकारों की प्रभावी तरीके से रक्षा करना है। कानून के साथ-साथ इसके तहत बनाए गए विभिन्न नोटिफाइड नियमों और प्रावधानों के माध्यम से भी उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा में मदद मिलती है।
उपभोक्ताओं के लिए CCPA का महत्व
आज बाजार में खाद्य पदार्थों से लेकर डिजिटल सेवाओं तक उपभोक्ताओं के सामने बड़ी संख्या में विकल्प उपलब्ध हैं। ऐसे में किसी उत्पाद या सेवा के बारे में दी गई जानकारी का सही और स्पष्ट होना बेहद महत्वपूर्ण है। ‘100%’ जैसे दावों के मामले में मुख्य चिंता यह है कि उपभोक्ता इसे उत्पाद की पूर्ण शुद्धता या पूर्णतः उसी सामग्री से निर्मित होने के अर्थ में समझ सकता है। इसलिए ऐसे दावों की निगरानी उपभोक्ता हितों की रक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
CCPA को प्राप्त शक्तियां उसे ऐसे मामलों में जांच करने, भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाने और आवश्यक होने पर संबंधित पक्षों के खिलाफ जुर्माना लगाने में सक्षम बनाती हैं।

